asha_kandara Jodhpur woman who was a sweeper is set to become deputy collector

RPSC RAS Result: आरपीएससी आरएएस परिणाम: स्वच्छता कार्यकर्ता ने धैर्य और दृढ़ संकल्प की कहानी में परीक्षा उत्तीर्ण की

Asha Kandara RAS : जोधपुर की एक महिला स्वीपर आशा कंदारा ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास की। दो बच्चों की मां आशा कंदरा को जल्द ही डिप्टी कलेक्टर बनाया जाएगा। आठ साल पहले अपने पति से अलग हुई कंदारा ने अपने दो बच्चों की परवरिश करते हुए स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उसने 1997 में शादी कर ली, लेकिन जल्द ही शादी टूट गई, जिससे वह अपने दो बच्चों को अकेले पालने के लिए छोड़ गई। कंदरा ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार के समर्थन को दिया।

कंदरा 2018 में सिविल सेवा परीक्षा के लिए उपस्थित हुए, लेकिन, COVID-19 महामारी के कारण परिणाम में देरी हुई। जब 13 जुलाई 2021 को परिणाम घोषित किए गए, तो कंदरा की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था जब उन्हें पता चला कि वह पास हुई हैं। सिविल सेवा परीक्षा में बैठने के बाद उसे एक सफाईकर्मी की नौकरी मिल गई। वह अब कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

कंदरा ने कहा कि समाज में उन्हें जिस भेदभाव का सामना करना पड़ा, उसने उन्हें अपना जीवन बदलने के लिए प्रेरित किया। उसने यह भी कहा कि शुरू में, वह एक आईएएस अधिकारी बनना चाहती थी, लेकिन उम्र से संबंधित प्रतिबंधों के कारण परीक्षा में शामिल नहीं हो सकी। “हालांकि यह एक कठिन यात्रा थी और मुझे बहुत कुछ सहना पड़ा। अब मैं खुद को ऐसी स्थिति में मानती हूं जहां मैं वंचितों और अन्याय के शिकार लोगों के लिए कुछ करना चाहती हूं।”

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आशा कंदारा की इस धैर्य और दृढ़ संकल्प से रिलेटेड आप को लेखक: संदीप कुमार सिंह की कविता याद दिलाते है की

मत करना मन विचलित अपना
देर अगर जो हो जाए
ऐसा कुछ भी नहीं है जग में
जो न तुमसे हो पाए,
ज्ञान अगर हो लक्ष्य का अपने
दृढ़ संकल्प का भान रहे
निश्चित ही सफलता मिल जाएगी
तुम खड़े जो सीना तान रहे।

राह नहीं आसान है ये
मुश्किल रस्ते में आएगी
किस्मत पे भरोसा मत करना
ये राह तुम्हें भटकाएगी,
मत हारना हिम्मत इनसे तुम
चाहे जितनी घमासान रहे
निश्चित ही सफलता मिल जायेगी
तुम खड़े जो सीना तान रहे।

जो कमी कोई रह जाती है
तो उसका तुम अभ्यास करो
जो गिरते हो तुम एक दफा
तो उठकर फिर प्रयास करो,
लगे रहो तुम कर्म में अपने
जब तक इस तन में प्राण रहे
निश्चित ही सफलता मिल जायेगी
तुम खड़े जो सीना तान रहे।

गिरने में वक़्त नहीं लगता
लगता है नाम कमाने में
खुद ही चलना पड़ता है
न बनता है साथी कोई ज़माने में,
सच्चाई की राह जो चलते
समाज में उसकी शान रहे
निश्चित ही सफलता मिल जायेगी
तुम खड़े जो सीना तान रहे।

कुछ भी करना तुम जीवन में
मगर कभी न वो काम करना
हो जाए जिससे बदनामी
और जीना भी लगे मरना,
इस तरह से रहना तुम कि
बना तुम्हारा सम्मान रहे
निश्चित ही सफलता मिल जाएगी
तुम खड़े जो सीना तान रहे।

यह कहानी और कविता आपको कैसी लगी ? और इस से आप क्या सीखते है इस कहानी और कविता के बारे में अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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